अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

पेड़ पर कविता

पेड़ पर कविता | Hindi Short Story by Pankaj Girish

उसने पेड़ पर कविता लिखी। लोगों को खूब पसन्द आयी। वह कविता एक प्रतियोगिता में पुरस्कृत भी हुई। कवि का अच्छा-खासा नाम हो गया।

कुछ दिनों के बाद कवि को एक अच्छा ऑफर मिला। एक कम्पनीवाले उसके आँगन में एक बड़ा-सा गोदाम बनाना चाहते थे। गोदाम बनाने का खर्चा कम्पनी का और हर महीने पन्द्रह हजार रुपये किराया भी दिया जायेगा।

पैतृक जमीन थी। कवि के पास से कुछ जाना ही नहीं था। आना-ही-आना था। सौदा पट गया। कवि मालामाल हो गया। गोदाम बनाने की एवज में कवि को आँगन में लगे दो पुराने नीम के पेड़ कटवाने पड़े, बस।

-गिरीश पंकज

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