भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

पहचान

पहचान | Pahchaan

अपनी गली
मोहल्ला अपना,
अपनी बाणी
खाना अपना,
थी अपनी भी इक पहचान।

महानगर में बसे हुए हैं
बड़े-बड़े हैं सभी मकान,
फ़ीकी हँसी लबों पर रखते
सुंदर डाले हैं परिधान,
भीड़भाड़ में ढूँढ रहे हैं
खोई हुई अपनी पहचान।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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