समस्त आर्यावर्त या ठेठ हिंदुस्तान की राष्ट्र तथा शिष्ट भाषा हिंदी या हिंदुस्तानी है। -सर जार्ज ग्रियर्सन।

रमेश पोखरियाल 'निशंक' की क्षणिकाएँ

रमेश पोखरियाल 'निशंक' की क्षणिकाएँ | Kshnikayein by Nishank

रिश्ते

रिश्ते निभाने के लिए
कहाँ कसमें खानी पड़ती हैं
कहाँ शर्तें रखनी पड़ती
हैं भारी ।
रिश्तों में होनी चाहिए
बस, ईमानदारी, विश्वास
और समझदारी।

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दोस्ती

दोस्ती बड़ी नहीं होती है
निभानेवाला बड़ा होता है,
दोस्ती कर, नहीं निभा सकनेवाला
हमेशा चौराहे पर रोता है।

#

वजह

यादों की मीनार बनकर
मरने-बिछुड़ने पर भी
संबंधों को नहीं खोते हैं।
जो जिंदगी जीने की
वजह बन जाते हैं
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं।

- रमेश पोखरियाल 'निशंक'

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