भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

निर्मला | उपन्यास

निर्मला | उपन्यास | Nirmla By Munshi Premchand

'निर्मला'  मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखा गया एक बहुचर्चित उपन्यास है। इसका प्रकाशन सन 1927 में हुआ था। मुंशी प्रेमचंद  ने दहेज़ प्रथा और अनमेल विवाह को आधार बना कर इस उपन्यास का लेखन प्रारम्भ किया।  प्रेमचन्द्र के जिन उपन्यासों ने साहित्य के मानक स्थापित किए,  उनमें निर्मला अग्रणी माना जाता है। इसमें हिन्दू समाज में स्त्री के स्थान का सशक्त चित्रण किया गया है। निर्मला पर बना दूरदर्शन का सीरियल भी बहुत लोकप्रिय हुआ है।

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।