विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

नैतिकता का बोध

नैतिकता का बोध | Hindi Short Story by Raghuvir Sahay

एक यात्री ने दूसरे से कहा, "भाई जरा हमको भी बैठने दो।"

दूसरे ने कहा, "नहीं! मैं आराम करूंगा। "पहला आदमी खड़ा रहा। उसे जगह नहीं मिली, पर वह चुपचाप रहा।

दूसरा आदमी बैठा रहा और देखता रहा। बड़ी देर तक वह उसे खड़े हुए देखता रहा। अचानक उसने उठकर जगह कर दी और कहा, "भाई अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। आप यहां बैठ जाइए।"

-रघुवीर सहाय

[ लघु कथा देश देशान्तर,  संपादक-सुकेश साहनी, रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु',  अयन प्रकाशन, 2013]

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