भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

राम रतन धन पायो | मीराबाई के पद

रचनाकार: मीराबाई
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राम रतन धन पायो | मीराबाई के पद | Ram Ratan Dhan Payo - Meera Ke Pad

राम रतन धन पायो

पायो जी म्हे तो रामरतन धन पायो।
बस्तु अमोलक दी म्हारे सतगुरु, किरपा को अपणायो।
जनम जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।
खरचै नहिं कोई चोर न लेवै, दिन-दिन बढत सवायो।
सत की नाव खेवहिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।
मीरा के प्रभु गिरधरनागर, हरख-हरख जस पायो॥

- मीरा

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