देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

लोलुप शृंगाल

रचनाकार: भारत-दर्शन संकलन | Collections
रेटिंग: 0/5 (0 मत)

एक नदी के किनारे दो भेड़ लड़ रहे थे। क्रोध से दोनों भेड़ दूर हट-हट करके पुनः एकत्र होकर मस्तकों से एक-दूसरे पर प्रहार कर रहे थे। उन दोनों के मस्तक से रुधिर निकलने लगा। इसी बीच वहाँ एक शृंगाल आ पहुंचा और वहाँ बहती हुई रुधिर की धारा को देखकर लोभ में दोनों के बीच में घुसकर रुधिर पीने लगा। इसके बाद उन दोनों के मस्तक के प्रहार के बीच में पड़कर शृंगाल मर गया।

शिक्षा : जब दो लोग कलह कर रहे हों तो बीच में शृंगाल की तरह नहीं घुसना चाहिए।

[प्रबंधपञ्चशती]

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।