कोई कौम अपनी जबान के बगैर अच्छी तालीम नहीं हासिल कर सकती। - सैयद अमीर अली 'मीर'।

लेखक-प्रकाशक संवाद

लेखक-प्रकाशक संवाद | Hindi Laghukatha by Balram Agarwal

"नमस्ते कमाल साहब! मुझे राघव कहते हैं।

"जी, नमस्कार ! क्या सेवा करूँ...पूछ सकता हूँ?"

"किसान हूँ साहब! कागज के खेत को कलम से जोतता हूँ, शब्द बोता हूँ, और..."

"समझ गया, समझ गया ! सेवा बताइए।"

"आप तो 'आढ़ती' हैं शब्दों के...।"

"हैं तो; लेकिन... अपना माल आप कितना खुद उठा लोगे और कितना दूसरों को उठवा दोगे-यह हैसियत बताइए और जब चाहें तब, कागजों के वजन बराबर रकम साथ में लेकर आ जाइए।"

—बलराम अग्रवाल
[तैरती हैं पत्तियाँ, अनुज्ञा बुक्स, दिल्ली]

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