अकबर से लेकर औरंगजेब तक मुगलों ने जिस देशभाषा का स्वागत किया वह ब्रजभाषा थी, न कि उर्दू। -रामचंद्र शुक्ल

कुछ न किसी से कहें जनाब | ग़ज़ल

कुछ न किसी से कहें जनाब | Ghazal by Rekha Rajvanshi

कुछ न किसी से कहें जनाब
अच्छा है चुप रहें जनाब

दुनिया बेहद जालिम है
हंसके सब कुछ सहें जनाब

पत्थर से न सख्त रहें
पानी बन के बहें जनाब

और कभी तो खोलें भी
अपने मन की तहें जनाब

कुछ तो मज़बूती रखिये
बालू से न ढहें जनाब

राजमहल को क्यों देखें
जितना है खुश रहें जनाब

-रेखा राजवंशी, ऑस्ट्रेलिया

 

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