भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

कुछ मीठे, कुछ खट्टे अनुभव : 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन

कुछ मीठे, कुछ खट्टे अनुभव : 10वां विश्व हिंदी सम्मेलन | Vishwa Hindi Sammelan

विश्व हिंदी सम्मेलन भव्य था। इसकी सराहना भी हुई, विरोध भी, आलोचना भी और जैसा कि होता आया है यह विवादों से परे भी नहीं था।

सम्मेलन आरम्भ होने से पहले ही यह विवादों के घेरे में आ गया था। इसका प्रतीक चिन्ह, इसकी वेब साइट और सरकारी कार्यप्रणाली! इन सब का विरोध व आलोचना पहले से ही शुरू हो गई थी। आइए, आपको ले चलते हैं इस दसवें विश्व हिंदी सम्मेलन की खट्टी-मीठी यात्रा पर।

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