साँसों में है जब तक दम
किसे नहीं है बोलो ग़म!
हँस-हँस यूं तो बोल रहे हो
पर आँखें हैं क्योकर नम !
उठो, इरादे करो बुलंद
तूफ़ाँ भी जाएँगे थम !
चट्टानों से रखो इरादे
तुम्हें डिगा दे किसमें दम!
कितनी भी बाधाएं आएं
आत्म-शक्ति हो न कम!
उदय हो रहा सूरज देखो
कहाँ बचेगा बोलो तम !
- रोहित कुमार 'हैप्पी'
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