राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

खेल का खेल

खेल का खेल | Hindi poem by Rohit kumar Happy

हार और जीत
भोगते हैं तीनों ही - अनाड़ी, जुगाड़ी और खिलाड़ी।
अनाड़ी को हारने पर
आती है शर्म।

जुगाड़ी
गुस्साता है,
लेकिन
खिलाड़ी हार से भी
कुछ नया
सीख जाता है;
इसलिए
हारकर भी जीत जाता है।

खेल हार-जीत में नहीं है
खेल ये है कि आप -
खेल खेलते हैं।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

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