हिंदी भाषा अपनी अनेक धाराओं के साथ प्रशस्त क्षेत्र में प्रखर गति से प्रकाशित हो रही है। - छविनाथ पांडेय।

कंकड चुनचुन

कंकड चुनचुन महल उठाया | Kabir Bhajan

कंकड चुनचुन महल उठाया
        लोग कहें घर मेरा। 
ना घर मेरा ना घर तेरा
        चिड़िया रैन बसेरा है॥

जग में राम भजा सो जीता ।
        कब सेवरी कासी को धाई 
कब पढ़ि आई गीता ।
        जूठे फल सेवरी के खाये  
तनिक लाज नहिं कीता ॥ 

- कबीर 

 

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