भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

जीवन और मौसम

जीवन और मौसम | संघर्ष जारी है | Hindi Poem by Dr Ramesh Pokhriyal Nishank

छँटने लगे हैं बादल
धुंध होने लगी कम,
नई सुबह की है आहट
बदलने लगा मौसम। 
दिखने लगा रास्ता
मिटने लगा है भ्रम,
जीवन की घोर बाधाएँ
दृढ़ता के सामने
पड़ने लगी हैं कम। 
प्रकृति के साथ-साथ
जीवन का भी
बदलने लगा जीवन।

- रमेश पोखरियाल 'निशंक'
      [संघर्ष जारी है]

 

 

 

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