अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

जाति

जाति | Hindi Satire Story by Harishankar Parsai

कारख़ाना खुला। कर्मचारियों के लिए बस्ती बन गई।

ठाकुरपुरा से ठाकुर साहब और ब्राह्मणपुरा से पंडितजी कारखा़ने में नौकरी करने लगे और पास-पास के ब्लॉक में रहने लगे। ठाकुर साहब का लड़का और पंडितजी की लड़की दोनों जवान थे। उनमें पहचान हुई और पहचान इतनी बढ़ी कि दोनों ने शादी करने का निश्चय किया।

जब प्रस्ताव आया तो पंडितजी ने कहा-- 'ऐसा कभी हो सकता है भला? ब्राह्मण की लड़की ठाकुर से शादी करे! जाति चली जाएगी।' ठाकुर साहब ने भी कहा कि ऐसा नहीं हो सकता। पर-जाति में शादी करने से हमारी जाति चली जाएगी।

किसी ने उन्हें समझाया कि लड़का-लड़की बड़े हैं। पढ़े-लिखे हैं। समझदार हैं। उन्हें शादी कर लेने दो। अगर शादी नहीं की तो भी वे चोरी छिपे मिलेंगे और तब जो उनका संबंध होगा वह व्यभिचार कहलाएगा।

इस पर ठाकुर साहब और पंडितजी एक स्वर में बोले-- 'होने दो। व्यभिचार से जाति नहीं जाती है; शादी से जाती है।'

-हरिशंकर परसाई

 

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