राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

उत्‍तम उपासना

रचनाकार: शेख़ सादी
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उत्‍तम उपासना | Gulistan Stories

एक अत्याचारी बादशाह ने किसी साधु से पूछा कि मेरे लिए कौन-सी उपासना उत्‍तम है?

उत्‍तर मिला कि तुम्हारे लिए दोपहर तक सोना सब उपासनाओं से उत्‍तम है, जिससे उतनी देर तुम किसी को सता न सको।

- शेख़ सादी

 

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