यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

फिज़ी द्वीप में मेरे 21 वर्ष

फ़िजी द्वीप में मेरे 21 वर्ष | Story of Fiji by Totaram

यदि आप शर्तबंध मज़दूरों यानी अनुबंधित श्रमिकों के बारे में जानना चाहते हैं तो फ़िजी प्रवास पर लिखी गई तोताराम सनाढय की पुस्तक इस क्रम में सर्वश्रेष्ठ कही जा सकती है। वे स्वयं अनुबंधित श्रमिक के रूप में फ़िजी गए थे और इसके यह आत्मकथा उन हज़ारों श्रमिकों की कहानी है जो धोखे से, झूठे सब्ज़बाग दिखाके फ़िजी भेज दिए गए थे।

किस तरह भारत में बसे आरकटों ने भोले-भाले मजबूर लोगों को सातसमंदर पार मज़दूरी करने भेज दिया - यह पुस्तक उन श्रमिकों के क्रंदन, उनकी त्रासदी की कथा है।

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