देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
चलो मन गंगा-जमना-तीर
गंगा-जमना निरमळ पाणी सीतल होत सरीर ।
बंसी बजावत गावत कान्हो संग लियाँ बळ बीर ।।
मोर मुगट पीतांबर सोहै कुण्डळ झळकत हीर ।
मीराके प्रभु गिरधर नागर चरणकॅवलपर सीर ।।
-मीरा
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