कोई कौम अपनी जबान के बगैर अच्छी तालीम नहीं हासिल कर सकती। - सैयद अमीर अली 'मीर'।

चल तू अकेला! | रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविता

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो तू चल अकेला,
चल अकेला, चल अकेला, चल तू अकेला!
तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो चल तू अकेला,
जब सबके मुंह पे पाश..
ओरे ओरे ओ अभागी! सबके मुंह पे पाश,
हर कोई मुंह मोड़के बैठे, हर कोई डर जाय!
तब भी तू दिल खोलके, अरे! जोश में आकर,
मनका गाना गूंज तू अकेला!
जब हर कोई वापस जाय..
ओरे ओरे ओ अभागी! हर कोई बापस जाय..
कानन-कूचकी बेला पर सब कोने में छिप जाय...

- रवीन्द्रनाथ ठाकुर


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Poem by Rabindranath Tagore

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 1

S
S. R Sharma srsharma2311@gmail.com
25-Nov-2015 13:48
एक ऐसी कविता जो दिल की गहराइयों मैं उत्तर जाए|

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