हिंदी भाषा अपनी अनेक धाराओं के साथ प्रशस्त क्षेत्र में प्रखर गति से प्रकाशित हो रही है। - छविनाथ पांडेय।

भारत की जय | कविता

भारत की जय | चन्द्रधर शर्मा गुलेरी की कविता | Poem by Guleri

हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, क्रिस्ती, मुसलमान
पारसीक, यहूदी और ब्राह्मन
भारत के सब पुत्र, परस्पर रहो मित्र
रखो चित्ते गणना सामान
मिलो सब भारत संतान
एक तन एक प्राण
गाओ भारत का यशोगान

--चंद्रधर शर्मा गुलेरी

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