अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

बन्दर | लघुकथा

रचनाकार: चंद्रधर शर्मा गुलेरी
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बन्दर | Bandar-A Classic Short Story by Chandradhar Sharma Guleri

प्रेत समुद्र के पास किसी नगर के वासी बड़े विलासी और आलसी थे और परमेश्वर ने उन्हें धर्मोपदेश करने को, हजरत मूसा को भेजा। मूसा ने बड़ी गम्भीरता से उन्हें अपने सिद्धान्त समझाए और धर्मोपदेश दिया। उन महाशयों ने मूसा की ओर मुंह चिढ़ाया और उसके भाषण को सुनकर जंभाड्यां लीं और दांत निकालकर मूसा को स्पष्ट सुना दिया कि हमें तुम्हारी जरूरत नहीं है। मूसा ने अपना रास्ता लिया।... वे सब मनुष्य बन्दर हो गये। अब वे जगत की ओर मजे में मुह चिढ़ाते हैं और चिढ़ाते ही रहेंगे। 

-चंद्रधर शर्मा गुलेरी 

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