भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

हिसाब बराबर

हिसाब बराबर | Hindi Poem by Divya Mathur

हम फूलों पर सोए
एक दफ़ा
फूल हम पर सोए
एक दफ़ा
हिसाब बराबर।

- दिव्या माथुर

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