देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

ठाकुर का कुआँ | कविता

रचनाकार: ओमप्रकाश वाल्मीकि | Om Prakash Valmiki
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चूल्‍हा मिट्टी का
मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का ।

भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का ।

बैल ठाकुर का
हल ठाकुर का
हल की मूठ पर हथेली अपनी
फ़सल ठाकुर की ।

कुआँ ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्‍ले ठाकुर के
फिर अपना क्‍या ?
गाँव ?
शहर ?
देश ?

-ओमप्रकाश वाल्मीकि

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 1

R
Rakesh Shekhar rkshekhar4@gmail.com
17-Nov-2015 14:41
bahut achha

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