देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर और मुंशी प्रेमचंद | प्रेमचंद के किस्से

रचनाकार: भारत-दर्शन संकलन | Collections
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एक बार कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' मुंशी प्रेमचंद से पूछ बैठे, "मुंशीजी आप कैसे कागज़ पर और कैसे 'पेन' से लिखते हैं?"

प्रेमचंद ज़ोर से हँसे और उत्तर दिया, "ऐसे काग़ज पर जिसपर पहले से कुछ न लिखा हो और ऐसे 'पेन' से जिसका निब न टूटा हो!" फिर ज़रा गंभीर होकर बोले, "भाई जान! ये सब 'चोंचले' हम जैसे कलम के मज़दूरों के लिए नहीं हैं !"

[भारत-दर्शन संकलन]

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