देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
मैं ही धोखे में था | प्रेमचंद के किस्से
मुंशी प्रेमचंद बड़े शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्हें कभी क्रोध नहीं आता था, लेकिन एक बार उन्हें किसी पर गुस्सा आ गया और वह बोले, "क्या कहूँ, मैं आपको एक शरीफ आदमी समझता था, परन्तु आप तो...।"
दूसरा व्यक्ति बीच में ही बोल उठा, "जी, मेरी धारणा भी आपके प्रति ऐसी ही थी।"
प्रेमचंद ने तत्काल व्यंग्य-भरे शब्दों में कहा, "आपकी धारणा तो सच निकली, मैं ही धोखे में था।"
[भारत-दर्शन संकलन]
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