देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
लेखक
जेबकतरे ने उसकी जेब काटी तो लगा था कि काफी माल हाथ लगा है, भारी जान पड़ती थी। देखा तो सब के सब काग़ज़ निकले। काग़ज़ों पर नजर डाली तो तीन कविताएँ, एक कहानी और दो लघु-कथाएं थीं। नोट एक भी न था।
जेबकतरे को लेखक की जेब काटने का पछतावा हो रहा था।
- रोहित कुमार 'हैप्पी'
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)