देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

बिहारी के दोहे | Bihari's Couplets

रीति काल के कवियों में बिहारी सर्वोपरि माने जाते हैं। सतसई बिहारी की प्रमुख रचना हैं। इसमें 713 दोहे हैं। बिहारी के दोहों के संबंध में किसी ने कहा हैः

सतसइया के दोहरा ज्यों नावक के तीर।
देखन में छोटे लगैं घाव करैं गम्भीर।।

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नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास यहि काल।
अली कली में ही बिन्ध्यो आगे कौन हवाल।।

कोटि जतन कोऊ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच।
नल बल जल ऊँचो चढ़ै, तऊ नीच को नीच।।

कब को टेरत दीन ह्वै, होत न स्याम सहाय।
तुम हूँ लागी जगत गुरु, जगनायक जग बाय।।

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प्रतिक्रियाएं (Comments) - 3

C
Chand Shaikhchand460@gmail.com
16-Jan-2019 05:16
Very nice doha sir
s
shailendra Tiwari hitlertiwari@yahoo.com
27-Nov-2015 12:31
वाओ क्या बात है आज के कबि तो सिर्फ अपने बारे में लिखते है
हमारे साथ क्या हुआ
b
brij.kumar brijnandankumar1991@gmail.com
25-Nov-2015 08:11
थैंक्स

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