देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

भूगोल | लघु-कथा

रचनाकार: चंद्रधर शर्मा गुलेरी
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एक शिक्षक को अपने इंस्पेक्टर के दौरे का भय हुआ और वह क्लास को भूगोल रटाने लगा। कहने लगा कि पृथ्वी गोल है । यदि इंस्पेक्टर पूछे कि पृथ्वी का आकार कैसा है और तुम्हें याद न हो तो मैं सुंघनी की डिबिया दिखाऊंगा, उसे देखकर उत्तर देना। गुरु जी की डिबिया गोल थी ।

इंस्पेक्टर ने आकर वही प्रश्न एक विद्यार्थी से किया और उसने बड़ी उत्कंठा से की ओर देखा । गुरु ने जेब में से चौकोर डिबिया निकाली । भूल से दूसरी डिबिया आई थी । लड़का बोला, "बुधवार को पृथ्वी चौकौर होती है और बाकी सब दिन गोल ।"

-गुलेरी

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