देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
बदलीं जो उनकी आँखें
बदलीं जो उनकी आँखें, इरादा बदल गया ।
गुल जैसे चमचमाया कि बुलबुल मसल गया ।
यह टहनी से हवा की छेड़छाड़ थी, मगर
खिलकर सुगन्ध से किसीका दिल बदल गया ।
ख़ामोश फ़तह पाने को रोका नहीं रुका
मुश्किल मुकाम, ज़िंदगी का जब सहल गया ।
मैंने कला की पाटी ली है शेर के लिए,
दुनियां के गोलन्दाजों को देखा, दहल गया ।
- निराला
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