देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
आज का आदमी | सुशांत सुप्रिय की कविता
मैं ढाई हाथ का आदमी हूँ
मेरा ढाई मील का ' ईगो ' है
मेरा ढाई इंच का दिल है
दिल पर ढाई मन का बोझ है
- सुशांत सुप्रिय
मार्फ़त श्री एच.बी. सिन्हा
5174 , श्यामलाल बिल्डिंग ,
बसंत रोड,( निकट पहाड़गंज ) ,
नई दिल्ली - 110055
मो: 9868511282 / 8512070086
ई-मेल : sushant1968@gmail.com
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