भय ही पराधीनता है, निर्भयता ही स्वराज्य है। - प्रेमचंद।

ये शोर करता है कोई

कितना और बोले
कोई तो बताए
सुनाई देती नहीं
कोई तो समझाये
काबिल है कोई
देखता नहीं कोई
खो गया है कोई
ढूंढे तो कोई
फिर मत कहना कोई
ये शोर करता है कोई

- मोहित कुमार शर्मा

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