देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना | ग़ज़ल
ये दुनिया तुम को रास आए तो कहना
न सर पत्थर से टकराए तो कहना
ये गुल काग़ज़ हैं ये ज़ेवर हैं पीतल
समझ में जब ये आ जाए तो कहना
बहुत ख़ुश हो कि उस ने कुछ कहा है
न कह कर वो मुकर जाए तो कहना
बदल जाओगे तुम ग़म सुन के मेरे
कभी दिल ग़म से घबराए तो कहना
धुआँ जो कुछ घरों से उठ रहा है
न पूरे शहर पर छाए तो कहना
-जावेद अख्तर
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