राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी।
यदि मैं तानाशाह होता
यदि मैं तानाशाह होता........
- तो आज ही विदेशी भाषा में शिक्षा का दिया जाना बंद कर देता।
- सारे अध्यापकों को स्वदेशी भाषाएँ अपनाने को मजबूर कर देता।
- जो आनाकानी करते, उन्हें बर्ख़ास्त कर देता।
- मैं पाठ्य पुस्तकों के तैयार किए जाने का इन्तजार न करता।
साभार - यंग इंडिया (हिंदी आंदोलन)
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)