वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं। - मैथिलीशरण गुप्त।

शराब

"बाबू! कुछ पैसें दे दो।”

".............................. ?

"बाबू! सुबह से रोटी नहीं खाई।"

"मैं भूखा मर जाऊँगा। मुझे कुछ पैसे दे दो।”

"...पर तेरे मुँह से तो शराब की गन्ध आ रही हैं।"

-अनिल कटोच

[फिर सुबह होगी]

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