देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
शराब
"बाबू! कुछ पैसें दे दो।”
".............................. ?
"बाबू! सुबह से रोटी नहीं खाई।"
"मैं भूखा मर जाऊँगा। मुझे कुछ पैसे दे दो।”
"...पर तेरे मुँह से तो शराब की गन्ध आ रही हैं।"
-अनिल कटोच
[फिर सुबह होगी]
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