पराधीनता की विजय से स्वाधीनता की पराजय सहस्रगुना अच्छी है। - अज्ञात।

सत्य और असत्य

मनुष्य की छाया मनुष्य से बोली, 'देखो! तुम जितने थे, उतने ही रहे, पर मैं तुमसे कितना गुना बढ़ गई हूँ।'

मनुष्य मुसकराया और बोला, "सत्य और असत्य में यही तो अंतर है। सत्य जितना है, जैसा है, वैसा ही जबकि असत्य छद्म और बल के सहारे घटता-बढ़ता रहता है।"

-मुक्तिनाथ सिंह

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।