देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

साथी, नया वर्ष आया है | हरिवंशराय बच्चन की नव वर्ष पर कविता

साथी, नया वर्ष आया है!
वर्ष पुराना, ले, अब जाता,
कुछ प्रसन्न सा, कुछ पछताता,
दे जी-भर आशीष, बहुत ही इससे तूने दुख पाया है!
साथी, नया वर्ष आया है!

उठ इसका स्वागत करने को,
स्नेह-बाहुओं में भरने को,
नए साल के लिए, देख, यह नई वेदनाएँ लाया है!
साथी, नया वर्ष आया है!

उठ, ओ पीड़ा के मतवाले,
ले ये तीक्ष्ण-तिक्त-कटु प्याले,
ऐसे ही प्यालों का गुण तो तूने जीवन भर गाया है!
साथी, नया वर्ष आया है!

- हरिवंशराय बच्चन
   [ निशा-निमंत्रण ]

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