मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।
साहित्य
जहाँ न हित-उपदेश कुछ, सो कैसा साहित्य?
हो प्रकाश से रहित तो, कौन कहे आदित्य?
- प्रताप नारायण मिश्र [24 सितम्बर, 1856 - 6 जुलाई, 1894]
आधुनिक हिंदी निर्माताओं में से एक थे। आप लेखक, कवि और पत्रकार थे।
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