हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

प्रयोगवाद

आलू!
उस पर एक और आलू,
फिर एक और आलू,
उस पर एक और आलू,
आलू, ऊपर आलू, उस पर आलू,
बोलो कृपालू
काव्य नहीं समझे
तो थैले से बैंगन भी निकालूं ?

- दिनेश कुमार गोयल
[गुदगुदी]

 

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