देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
नवल हर्षमय नवल वर्ष यह | सुमित्रानंदन पंत की नव वर्ष पर कविता
नवल हर्षमय नवल वर्ष यह,
कल की चिन्ता भूलो क्षण भर;
लाला के रँग की हाला भर
प्याला मदिर धरो अधरों पर!
फेन-वलय मृदु बाँह पुलकमय
स्वप्न पाश सी रहे कंठ में,
निष्ठुर गगन हमें जितने क्षण
प्रेयसि, जीवित धरे दया कर!
-सुमित्रानंदन पंत
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)