हिंदी का पौधा दक्षिणवालों ने त्याग से सींचा है। - शंकरराव कप्पीकेरी

नव वर्ष 2021

नव उमंग नव कलरव ध्वनि से
नए साल का हो सत्कार
मृदु राग मृदु करतल ध्वनि से
गुंजित हो सारा संसार।

सुरभित उपवन सा हो जीवन
नवल कंठ का हो संचार
नूतन वर्ष करें जन जन का
नव पल्लव पुलकित श्रृंगार।

कठिन दौर से भरा वर्ष अब
अवसान की ओर खड़ा है
तिमिर की घनघोर घटा अब
अंतिम रण की ओर खड़ा है।

सिखा गया यह वर्ष सभी को
संघर्षों में जीवन जीना
विपदा के तूफ़ानों में भी
तृण के सोपानों पर चढ़ना।

सन् 20 (2020) को विदा करें
अपने हृदय के अंतरमन से
सन् 21 (2021) का अभिवादन हो
नव संकल्पों के सिंचन से।

सबका शुभ हो सबका मंगल
न‌ए वर्ष का हो आरंभ
यही दुआ है सबका होवे
मृदु-मय जीवन का प्रारंभ।

-राजीव कुमार गुप्ता
ई-मेल: guptark560@gmail.com

 

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