राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।' - अनंत गोपाल शेवड़े

नए किस्से

हर चेहरे को गौर से देखो
छुपी हैं अनसुनी कहानियां
हंस के रोना रो के हंसना
जीवन की कुछ निशानियां

हर दिन इक नयी मंज़िल
इक तमन्ना दिल में है
हर दिन करना है कुछ हासिल
यह निश्चय मन में है

हर दिल में झांक कर देखो
मौजूद हैं अनदेखे पन्ने
इक बार शब्दों को पढ़ कर तो देखो
तभी तो तुम लिखोगे कुछ नए किस्से

- अनन्य दूबे
ananya.dubey194@gmail.com

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।