देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

मुल्ला नसरुद्दीन और बादशाह 

एक दिन बादशाह ने मुल्ला नसरुद्दीन से कहा, "आज सुबह मैंने अपनी सूरत आईने में देखी। मैं वाकई बदसूरत हूँ। अब कभी आईने में अपना चेहरा नहीं देखूंगा।" 

मुल्ला नसरुद्दीन तुरंत बोले, "आप तो अपनी सूरत एक दिन देखकर ही घबरा गए। मुझे तो दिन-रात देखनी पड़ती है। सोचिए, मेरा क्या हाल होता होगा!"

[मुल्ला नसरुद्दीन के किस्से]

 

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