हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

मोटा लाला

मोटा लाला, मोटा लाला
आ गए अपना पेट फुला कर
जब देखो तुम खाते रहते
बर्गर, समोसा मज़े ले-ले कर।

खाओ उतना जितनी भूख
छोड़ कर के 'जंक फ़ूड'।
हरी सब्ज़ी और दालों से
सदा रहोगे मस्त और स्वस्थI

-नमित कालरा (कक्षा 4), भारत
 ई-मेल: namitkalra2011@gmail.com

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।