हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
मोर
उमड़ उमड़ कर बादल आते
देख-देख खुश होता मोर ।
रंग-गीले पंख खोलकर
नाच दिखाता, करता शोर ।
अपने पाँव देख लेता जब
तो बेचारा होता बोर ।
-जय प्रकाश भारती
[ 100 श्रेष्ठ बालगीत, गीतांजलि प्रकाशन ]
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)