मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।

मेरे हिस्से का आसमान

मेरे हिस्से का आसमान
कुछ ज्यादा ही ऊँचा हो गया है,
और मैं बावरी बार-बार
उस ऊँचाई तक पहुँचने में
अपनी सारी ताकत लगा देती हूँ। 
नहीं आ पाता आसमान का वह टुकड़ा
मेरे हाथ,
मालूम चला है
वह पहले से ही झपट लिया गया है,
अवसरवादियों और खुशामदियों के द्वारा
और अब मैंने आसमान की बुलंदियों को छोड़
अपनी जमीन पर ही बने रहने का फैसला ले लिया है। 

- प्रो॰ बीना शर्मा

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