देहात का विरला ही कोई मुसलमान प्रचलित उर्दू भाषा के दस प्रतिशत शब्दों को समझ पाता है। - साँवलिया बिहारीलाल वर्मा।
मामा आए, मामा आए | शिशु कविता
मामा आए, मामा आए
मामा आए, क्या क्या लाए
मामा लाए चना चबेना
मामा लाए तोता मैना
मामा लाए खेल खिलौना
मामा लाए बुड्डा बौना
मामा लाए बानर भालू
मामा लाए बैंगन आलू
मामा लाए गुड्डा गुड़िया
मामा लाए मीठी पुड़िया
-अमरनाथ
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