कोई कौम अपनी जबान के बगैर अच्छी तालीम नहीं हासिल कर सकती। - सैयद अमीर अली 'मीर'।

लूट मची है चारों ओर | ग़ज़ल 

लूट मची है चारों ओर, सारे चोर
इक जंगल और लाखों मोर, सारे चोर

इक थैली में अफसर भी, चपरासी थी
क्या ताकतवर, क्या कमजोर, सारे चोर

उजले कुर्ते पहन रखे हैं, सांपों ने
यह जहरीले आदमखोर, सारे चोर

झूठ नगर में, रोज निकालो मौन जुलूस
कौन सुनेगा सच का शोर, सारे चोर

हम किस-किस का नाम गिनाए 'राहत खां'
दिल्ली के आवारा ढोर, सारे चोर

- राहत इंदौरी

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।