हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
जोगिन्द्र सिंह कंवल | फीजी के कवि
जोगिन्द्र सिंह कंवल की साहित्यिक यात्रा, 'मेरा देश मेरे लोग' से प्रारंभ हुई थी।
कंवल फीजी के एक सर्वाधिक लब्धप्रतिष्ठ लेखक हैं। उनके चिंतन में गहराई है।
जोगिन्द्र जी ने सदैव अपनी रचनाओं के माध्यम फीजी के जन-जीवन को चित्रित करने का प्रयास किया है।
फीजी में हुए विभिन्न राजनैतिक तख्ता-पलटों (कू) ने इस छोटे से देश, विशेषत: भारतीय समाज को अत्याधिक प्रभावित किया है। फीजी में बसे भारतीय मूल के लोगों ने अनगिनित कष्टों का सामना किया है। जोगिन्द्र सिंह कंवल की रचनाएं इन्हीं दर्दों को चित्रित करती हैं।
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