देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
झिलमिल आई है दीवाली
जन-जन ने हैं दीप जलाए
लाखों और हजारों ही
धरती पर आकाश आ गया
सेना लिए सितारों की
छुप गई हर दीपक के नीचे
देखो आज अमावस काली
सुंदर-सुंदर दीपों वाली
झिलमिल आई है दीवाली
[भारत-दर्शन संकलन]
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