हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
जामुन
पौधा तो जामुन का ही था
लेकिन आये आम
पर जब खाया, तब यह पाया
ये तो है बादाम
जब उनको बोया ज़मीन में
पैदा हुए अनार
पकने पर हो गये संतरे
मैंने खाए चार।
-श्रीप्रसाद
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